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स्वास्थ्य घरेलू नुस्खेबवासीर के मस्से का इलाज picsबवासीर का घरेलू उपचार Home Remedies For PilesBy वनिता कासनियां पंजाब,bavasir ka gharelu upchar,piles ka upchar, piles ka gharelu upchar,बवासीर ,बवासीर का घरेलू उपचार,piles ka ayurvedic upchar, bavasir ke masse sukhane ki medicine, bavasir ke masse par lagane ki medicine, bavasir mein parhej, bavasir mein kya khayenबवासीर के मस्से मलद्वार/anus के भीतरी सतह या बाहरी सतह पर हो जाते हैं। भीतरी बवासीर के मस्से दिखाई नहीं देते हैं। जबकि मलद्वार के बाहरी सतह पर बवासीर के मस्से दिखाई देते हैं। मल त्यागते वक्त इन मस्सों से जब खून निकलने की शिकायत होती है। तो उसे खुनी बवासीर कहते हैं। गुदा के बाहर निकले मस्से मोटे, खुजली करने वाले और पीड़ादायक होते हैं एवं रोगी ज्यादा देर तक बैठना मुस्किल हो जाता है।बवासीर के बाहरी मस्से को ठीक करने में आयुर्वेदिक जड़ी –बूटियां बहुत कारगर सिद्ध होती हैं। या यूँ कहे कि इस रोग का इलाज आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से करवाना चाहिए। बवासीर रोग लम्बे समय तक कब्ज की शिकायत बने रहने से हो जाती है। कब्ज के कारण मॉल त्यागते वक्त ज्यादा जोर लगाने की प्रक्रिया में गुदा एवं इसके आसपास की रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है। जिसके कारण इनमें सूजन आ जाती है। जो मस्से के रूप में विकसित हो जाती है।आयुर्वेदिक फिजिशियन और वेद पंचकर्मा हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर “डॉक्टर संतोष कुमार गुप्ता“ के अनुसार बवासीर रोग से राहत पाने के लिए दवा के साथ हीं खान –पान का में परहेज बरतना अति आवश्यक है। इसके अतिरिक्त औषधि के सेवन या मस्से पर लेप लगाने से भी मस्से को ठीक किया जा सकता है। आइये जाने डॉक्टर द्वारा बताई गयी बवासीर की अचूक औषधि के प्रयोग की जानकारी।बवासीर के मस्से सुखाने की औषधिअर्शकुठार रस/ Arshkuthar Ras – दिन में दो बार 2 टेबलेट सुबह और 2 टेबलेट रात के भोजन के बाद सेवन करना है।अभयारिष्ट /Abhayarishtam सिरप – दिन में दो बार सुबह और रात के भोजन के बाद 30 ml सिरप + 30ml पानी के साथ मिलाकर सेवन करना है।मस्से पर लगाने की औषधिस्नुही क्षीरहरिद्राअपामार्ग क्षारप्रयोग विधि –दस बूँद स्नुही क्षीर में एक चुटकी हरिद्रा और अपामार्ग अपामार्ग क्षार मिलाकर लेप तैयार कर लें। अब इस लेप को बवासीर के मस्से पर लगाने से मस्सा सुख कर गिर जाता है।ये दोनों औषधि बवासीर के मस्से को सुखाने में कारगर हैं।इसके अतिरिक्त आक /मदार के दूध को बवासीर के बाहरी मस्से पर लगाने से बवासीर का मस्सा सूख कर गिर जाता है।बवासीर में खाद्य पदार्थों से परहेजमांसाहार खाद्य पदार्थ, लाल मिर्च एवं मसालेदार गरिष्ट भोजन, प्रोसेस्ड फ़ूड का सेवन नहीं करना चाहिए।चाय , कॉफ़ी की जगह पर ग्रीन टी ले सकते है।उड़द की दाल , खटाई, रात का बचा हुआ खाना।आलू, बैंगन, अरवी, भिन्डी।शराब, तम्बाकू।बवासीर रोगियों को क्या भोजन में शामिल करना चाहिएकरेले का रस , मूली का रस एक दिन में 50 ग्राम से ज्यादा नहीं सेवन करना चाहिए।सब्जियों में पालक , गाजर, मूली, चुकुन्दर, जिमीकंद, टमाटर भोजन में शामिल करना चाहिए।फलों में कच्चा नारियल, केला,अनार, अमरुद, पपीता, आँवला, सुखा अंजीर।कुछ सूखे अंजीर को पानी में भीगा कर रात भर के लिए रख देना है। इसके बाद सुबह खाली पेट पानी से अंजीर निकाल कर खूब चबा –चबा कर खाना है। इसके बाद बचे हुए पानी को पी लेना है। इससे पेट में कब्ज नहीं होती है और कब्ज की शिकायत होने पर मल आसानी से बाहर निकलन जाती है। जिससे मस्से पर दबाव नहीं पड़ता है।बवासीर रोग की दवा से सम्बंधित डॉक्टर से सलाह प्राप्त करने के लिए लिंक पर क्लिक करिए।अन्य लेख पढ़िए :बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम से


बवासीर के मस्से का इलाज pics

बवासीर का घरेलू उपचार Home Remedies For Piles


By वनिता कासनियां पंजाब,

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बवासीर के मस्से मलद्वार/anus के भीतरी सतह या बाहरी सतह पर हो जाते हैं। भीतरी बवासीर के मस्से दिखाई नहीं देते हैं। जबकि मलद्वार के बाहरी सतह पर बवासीर के मस्से दिखाई देते हैं। मल त्यागते वक्त इन मस्सों से जब खून निकलने की शिकायत होती है। तो उसे खुनी बवासीर कहते हैं। गुदा के बाहर निकले मस्से मोटे, खुजली करने वाले और पीड़ादायक होते हैं एवं रोगी ज्यादा देर तक बैठना मुस्किल हो जाता है।
बवासीर के बाहरी मस्से को ठीक करने में आयुर्वेदिक जड़ी –बूटियां बहुत कारगर सिद्ध होती हैं। या यूँ कहे कि इस रोग का इलाज आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से करवाना चाहिए। बवासीर रोग लम्बे समय तक कब्ज की शिकायत बने रहने से हो जाती है। कब्ज के कारण मॉल त्यागते वक्त ज्यादा जोर लगाने की प्रक्रिया में गुदा एवं इसके आसपास की रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है। जिसके कारण इनमें सूजन आ जाती है। जो मस्से के रूप में विकसित हो जाती है।

आयुर्वेदिक फिजिशियन और वेद पंचकर्मा हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर “डॉक्टर संतोष कुमार गुप्ता“ के अनुसार बवासीर रोग से राहत पाने के लिए दवा के साथ हीं खान –पान का में परहेज बरतना अति आवश्यक है। इसके अतिरिक्त औषधि के सेवन या मस्से पर लेप लगाने से भी मस्से को ठीक किया जा सकता है। आइये जाने डॉक्टर द्वारा बताई गयी बवासीर की अचूक औषधि के प्रयोग की जानकारी।

बवासीर के मस्से सुखाने की औषधि

  • अर्शकुठार रस/ Arshkuthar Ras – दिन में दो बार 2 टेबलेट सुबह और 2 टेबलेट रात के भोजन के बाद सेवन करना है।
  • अभयारिष्ट /Abhayarishtam सिरप – दिन में दो बार सुबह और रात के भोजन के बाद 30 ml सिरप + 30ml पानी के साथ मिलाकर सेवन करना है।

मस्से पर लगाने की औषधि

    • स्नुही क्षीर
    • हरिद्रा
    • अपामार्ग क्षार

प्रयोग विधि –

  • दस बूँद स्नुही क्षीर में एक चुटकी हरिद्रा और अपामार्ग अपामार्ग क्षार मिलाकर लेप तैयार कर लें। अब इस लेप को बवासीर के मस्से पर लगाने से मस्सा सुख कर गिर जाता है।

ये दोनों औषधि बवासीर के मस्से को सुखाने में कारगर हैं।

इसके अतिरिक्त आक /मदार के दूध को बवासीर के बाहरी मस्से पर लगाने से बवासीर का मस्सा सूख कर गिर जाता है।

बवासीर में खाद्य पदार्थों से परहेज

    • मांसाहार खाद्य पदार्थ, लाल मिर्च एवं मसालेदार गरिष्ट भोजन, प्रोसेस्ड फ़ूड का सेवन नहीं करना चाहिए।
    • चाय , कॉफ़ी की जगह पर ग्रीन टी ले सकते है।
    • उड़द की दाल , खटाई, रात का बचा हुआ खाना।
    • आलू, बैंगन, अरवी, भिन्डी।
    • शराब, तम्बाकू।

बवासीर रोगियों को क्या भोजन में शामिल करना चाहिए

    • करेले का रस , मूली का रस एक दिन में 50 ग्राम से ज्यादा नहीं सेवन करना चाहिए।
    • सब्जियों में पालक , गाजर, मूली, चुकुन्दर, जिमीकंद, टमाटर भोजन में शामिल करना चाहिए।
    • फलों में कच्चा नारियल, केला,अनार, अमरुद, पपीता, आँवला, सुखा अंजीर।
    • कुछ सूखे अंजीर को पानी में भीगा कर रात भर के लिए रख देना है। इसके बाद सुबह खाली पेट पानी से अंजीर निकाल कर खूब चबा –चबा कर खाना है। इसके बाद बचे हुए पानी को पी लेना है। इससे पेट में कब्ज नहीं होती है और कब्ज की शिकायत होने पर मल आसानी से बाहर निकलन जाती है। जिससे मस्से पर दबाव नहीं पड़ता है।

बवासीर रोग की दवा से सम्बंधित डॉक्टर से सलाह प्राप्त करने के लिए लिंक पर क्लिक करिए।

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पर्यावरण है हम सबकी जान, इसलिए करो इसका सम्मान। By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाबप्रकृति का मत करो शोषण, सब मिलकर बचाओ पर्यावरण।पशु-पक्षी हैं धरती की शान, और पेड़ हैं धरती की जान।पेड़-पौधे हैं मानव के लिए वरदान, मत करो इनका अपमान।हर बच्चे को सिखाओ पर्यावरण की रक्षा का सबक।पर्यावरण पर है सबका हक, इसलिए इसकी रक्षा भी है सबका कर्तव्य।पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने का हक किसी को नहीं है, क्योंकि पर्यावरण का नुकसान है जीवन का अपमान।जहाँ न पेड़-पौधे हैं, न चिड़िया है, न हरियाली है, वहाँ जीवन केवल एक बोझ है।प्रकृति हमसे कुछ नहीं मांगती है, वह बस हमें देती जाती है। लेकिन लालच करने पर वह हमें दंड भी देती है।प्रकृति अपना अपमान कभी बर्दाश्त नहीं करती है।आप सभी को मूर्ख बना सकते हैं, लेकिन आप पर्यावरण को मूर्ख नहीं बना सकते हैं।मानव प्रकृति का बिल्कुल भी सम्मान नहीं करता है, क्योंकि वह स्वार्थी हो गया है।पकृति पहले हमें चेतावनी देती है, और जब हम चेतावनी के बाद भी नहीं सुधरते हैं… तो वह हमारा सर्वनाश कर देती है।पृथ्वी और प्रकृति आने वाली पीढ़ियों के धरोहर होते हैं। और हमें दूसरों के धरोहर की रक्षा करनी चाहिए।जब आर्थिक विकास पर्यावरण के हितों की अनदेखी करके किया जाता है, तो वह विकास राष्ट्र के लिए मुसीबतें खड़ी करता है।जिस दिन पृथ्वी में पर्यावरण नहीं होगा, उस दिन पृथ्वी में जीवन भी नहीं होगा।जबतक मानव अपना कर्तव्य नहीं समझेगा, तबतक पर्यावरण पर खतरा मंडराता हीं रहेगा।जबतक हरियाली है, तभी तक भविष्य है। जब हरियाली नहीं होगी तो कोई भविष्य भी नहीं होगा।अपने जन्मदिन पर एक पेड़ जरुर लगाएँ। मरने से पहले कम-से-कम 100 पेड़ जरुर लगाएँ।अगर मनुष्य उड़ सकता तो वह आसमान को भी प्रदूषित कर देता।सौर उर्जा भविष्य का उर्जा स्रोत है।मानव भी अजीब है, जो पहले पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता फिर पर्यावरण संरक्षण के लिए योजनाएँ बनाता है।जब पक्षी खतरे में होंगे, तो मानव भी खतरे से ज्यादा दूर नहीं होगा।जैसे-जैसे प्रकृति को नुकसान पहुँचता जायेगा, मनुष्य की स्वास्थ्य सम्बन्धित समस्याएँ भी बढ़ती जाएँगी।वह व्यक्ति जो कृत्रिम जीवन जीने का आदि हो चुका है और प्रकृति से दूर हो चुका है। वह व्यक्ति ककभी स्वस्थ्य नहीं रह सकता है।जो चीजें मधुमखियों को नुकसान पहुंचाती है, वो मानव को भी नुकसान पहुंचाती है।प्रकृति सभी जीवों की माँ है, इसलिए कोई भी जीव प्रकृति से बड़ा नहीं हो सकता है। लेकिन मानव खुद को प्रकृति से बड़ा समझने लगा है।जन-जन तक संदेश पहुंचाना है,पर्यावरण को बचाना है।(2)पर्यावरण की रक्षा,देश की रक्षा।(3)सुरक्षित रहेगा पर्यावरण हमारा,तब सुरक्षित होगा जीवन हमारा।(4)सबको मिलकर आना है,पर्यावरण का महत्व समझाना है।(5)सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण,यही हमारे जीवन का आवरण।यह भी पढ़ें – योग पर नारे – Yoga Slogan in Hindi(6)कण-कण करता है यही पुकार,पर्यावरण बचाओ पर्यावरण बचाओ।(7)daal daal paat paat paryavaran ki surksha hmare hathडाल-डाल पात-पात,पर्यावरण की सुरक्षा हमारे हाथ।(8)सोच बदलो, देश बदलो,पर्यावरण को संरक्षित कर लो।(9)पर्यावरण के प्राण है खतरे में,बचा लो इसे दे दो नया जीवनदान इसे।(10)धरती की सुनो पुकार,पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ।(11)जागरूक देश की एक ही पहचान,पर्यावरण को ना हो कोई नुकसान।(12)हाथ से हाथ मिलाओ, ढेर सारे पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ।(13)जीवन का एक ही सहारा,सबसे प्यारा पर्यावरण हमारा।(14)hum sab ne yah thana h, parkrti ko bachana hहम सब ने यह ठाना है,प्रकृति को अब बचाना है।Paryavaran Par Slogan(15)गांव-गांव तक संदेश पहुंचाएंगे,पर्यावरण को अब हम सब बचाएंगे।(16)पेड़ करते है प्रकृति की सुरक्षा,आओ हम सब मिलकर करें इनकी रक्षा।(17)पर्यावरण दिवस पर दान करें,एक पेड़ लगाकर महान बने।(18)आओ मिलकर कुछ काम करें,पर्यावरण को सुरक्षा प्रदान करें।(19)धरती-अंबर करते पुकार,पर्यावरण की सुरक्षा करो अपार।यह भी पढ़ें – तम्बाकू छोड़ो पर स्लोगन – Anti Tobacco Slogans in Hindi(20)पर्यावरण है अनमोल,इसका नहीं है कोई मोल।(21)paryavaran bachao, dhrti ko sundar banaoपर्यावरण बचाओ,धरती को स्वर्ग सा सुंदर बनाओ।(22)बच्चे-बूढ़े, नौजवान,पर्यावरण की सुरक्षा सबका काम।(23)पर्यावरण है प्रकृति का अनमोल उपहार,इसे कभी ना खोना।(24)एक दो तीन चार,पेड़ हमारे जीवन का आधार।(25)मत करो प्रकृति का शोषण,नहीं तो जीवन मुश्किल में पड़ जाएगा।(26)बात सुनो बात सुनो, प्रकृति की पुकार सुनो, पर्यावरण बचाओ।(27)प्रकृति को जो क्षति पहुंचाएगा,उसका जीवन नरक बन जाएगा।(28)अच्छे जीवन का एक ही आधार,प्रकृति का हो सम्मान।(29)पेड़ लगाएं,खुशहाल जीवन पाए।Slogan on Save Environment in Hindi(30)प्रकृति की हरियाली,खुशियों की ताली।(31)पेड़ लगाओ,पर्यावरण बचाओ।(32)प्रकृति को दो नया उपहार,चारों ओर पेड़ लगाओ।(33)पर्यावरण हुआ बेहाल,पेड़ लगाओ करो उपचार।(34)चारों ओर सन्नाटा है,प्रकृति बिना ना दाल है ना आटा है।(35)पेड़ लगाओ,अपनी जिम्मेदारी निभाओ।(36)प्रदूषण हटाओ,पर्यावरण बचाओ।(37)अलख जगाओ, पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ।(38)प्रकृति का मत करो शोषण,यही करती है हमारा पोषण।(39)आवाज उठाओ,पर्यावरण बचाने की मुहिम चलाओ।(40)बच्चा-बच्चा करता पुकार,पर्यावरण बचाओ धरती बचाओ।(41)पर्यावरण बचाओ,बदले में स्वच्छ और सुंदर प्रकृति पाओ।पेड़-पौधे हमें मुफ्त में ऑक्सिजन देते हैं, इसलिए ढेर सारे पड़े लगाओ। क्योंकि जब एक गैस का सिलेंडर खरीदने में इतने पासे लगते हैं, तो सोचो अगर ऑक्सिजन का सिलेंडर साँस लेने के लिए खरीदना पड़ेगा तो क्या होगा ?न जल को प्रदूषित करो, न वायु को और न वातावरण को।बाल वनिता महिला आश्रममुफ्त की चीज समझकर मत करना कभी प्रकृति का अपमान।

पर्यावरण है हम सबकी जान, इसलिए करो इसका सम्मान। By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब प्रकृति का मत करो शोषण, सब मिलकर बचाओ पर्यावरण। पशु-पक्षी हैं धरती की शान, और पेड़ हैं धरती की जान। पेड़-पौधे हैं मानव के लिए वरदान, मत करो इनका अपमान। हर बच्चे को सिखाओ पर्यावरण की रक्षा का सबक। पर्यावरण पर है सबका हक, इसलिए इसकी रक्षा भी है सबका कर्तव्य। पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने का हक किसी को नहीं है, क्योंकि पर्यावरण का नुकसान है जीवन का अपमान। जहाँ न पेड़-पौधे हैं, न चिड़िया है, न हरियाली है, वहाँ जीवन केवल एक बोझ है। प्रकृति हमसे कुछ नहीं मांगती है, वह बस हमें देती जाती है। लेकिन लालच करने पर वह हमें दंड भी देती है। प्रकृति अपना अपमान कभी बर्दाश्त नहीं करती है। आप सभी को मूर्ख बना सकते हैं, लेकिन आप पर्यावरण को मूर्ख नहीं बना सकते हैं। मानव प्रकृति का बिल्कुल भी सम्मान नहीं करता है, क्योंकि वह स्वार्थी हो गया है। पकृति पहले हमें चेतावनी देती है, और जब हम चेतावनी के बाद भी नहीं सुधरते हैं… तो वह हमारा सर्वनाश कर देती है। पृथ्वी और प्रकृति आने वाली पीढ़ियों के धरोहर होते हैं। और हम...

अप्रैल महीने के महत्वपूर्ण दिवस और तिथियाँ By वनिता कासनियां पंजाब 1 अप्रैलAns.- मूर्ख (अप्रैल फूल) दिवस, उड़ीसा दिवस 2 अप्रैलAns.- विश्व ऑटिज्म (स्वलीनता) जागरूकता दिवस 5 अप्रैलAns.- राष्ट्रीय मेरीटाइम दिवस 6 अप्रैलAns.- अंतराष्ट्रीय खेल दिवस 7 अप्रैलAns.- विश्व स्वास्थ्य दिवस, विशेष सुरक्षा समूह स्थापना दिवसनोट- 1948 में इसी दिन विश्व स्वास्थ्य संगठन का गठन किया गया था, लेकिन पहला विश्व स्वास्थ्य दिवस 1950 में मनाया गया । 10 अप्रैलAns.- विश्व होम्योपैथी दिवस 11 अप्रैलAns.- राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस 13 अप्रैलAns.- जलियांवाला बाग नरसंहार दिवस 14 अप्रैलAns.- बी.आर अम्बेडकर स्मरण दिवस, विश्व एयरोनॉटिक्स और ब्रह्माण्ड विज्ञान दिवस 17 अप्रैलAns.- विश्व हीमोफिलिया दिवस 18 अप्रैलAns.- विश्व विरासत दिवस 21 अप्रैलAns.- राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस, World Creativity and Innovation Day, National Secretaries day 22 अप्रैलAns.- विश्व पृथ्वी दिवसनोट- वर्ष 1970 में विश्व पृथ्वी दिवस की शुरुआत हुई। 23 अप्रैलAns.- विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस, विश्व अंग्रेजी भाषा दिवस 24 अप्रैलAns.- राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (राष्ट्रीय स्थानीय स्वशासन दिवस), प्रयोगशाला पशुओं के लिए विश्व दिवस 25 अप्रैलAns.- विश्व मलेरिया दिवस 28 अप्रैलAns.- अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक स्मृति दिवस, कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए विश्व दिवस 29 अप्रैलAns.- अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस

अप्रैल महीने के महत्वपूर्ण दिवस और  तिथियाँ               By  वनिता कासनियां पंजाब  1 अप्रैल Ans.-  मूर्ख (अप्रैल फूल) दिवस ,  उड़ीसा दिवस  2 अप्रैल Ans.-  विश्व ऑटिज्म (स्वलीनता) जागरूकता दिवस  5 अप्रैल Ans.-  राष्ट्रीय मेरीटाइम दिवस  6 अप्रैल Ans.-  अंतराष्ट्रीय खेल दिवस  7 अप्रैल Ans.-  विश्व स्वास्थ्य दिवस, विशेष सुरक्षा समूह स्थापना दिवस नोट-  1948 में इसी दिन विश्व स्वास्थ्य संगठन का गठन किया गया था, लेकिन पहला विश्व स्वास्थ्य दिवस 1950 में मनाया गया ।  10 अप्रैल Ans.-  विश्व होम्योपैथी दिवस  11 अप्रैल Ans.-  राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस  13 अप्रैल Ans.-  जलियांवाला बाग नरसंहार दिवस  14 अप्रैल Ans.-  बी.आर अम्बेडकर स्मरण दिवस, विश्व एयरोनॉटिक्स और ब्रह्माण्ड विज्ञान दिवस  17 अप्रैल Ans.-  विश्व हीमोफिलिया दिवस  18 अप्रैल Ans.-  विश्व विरासत दिवस  21 अप्रैल Ans.-  राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस , ...

हिन्दी दिवस : कब, क्यों और कैसे मनाएंBy समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाबहिंदी विश्व में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं में से एक है। विश्व की प्राचीन, समृद्ध और सरल भाषा होने के साथ-साथ हिंदी हमारी 'राष्ट्रभाषा' भी है। वह दुनिया भर में हमें सम्मान भी दिलाती है। हिंदी दिवस भारत में हर वर्ष '14 सितंबर' को मनाया जाता है। भारत की स्वतंत्रता के बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एकमत से यह निर्णय लिया कि हिंदी की खड़ी बोली ही भारत की राजभाषा होगी। इसी महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिंदी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर सन् 1953 से संपूर्ण भारत में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को 'हिंदी दिवस' के रूप में मनाया जाने लगा। हिंदी हिंदुस्तान की भाषा है। राष्ट्रभाषा किसी भी देश की पहचान और गौरव होती है। हिंदी हिंदुस्तान को बांधती है। इसके प्रति अपना प्रेम और सम्मान प्रकट करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है। इसी कर्तव्य हेतु हम 14 सितंबर के दिन को 'हिंदी दिवस' के रूप में मनाते हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी तक, साक्षर से निरक्षर तक प्रत्येक वर्ग का व्यक्ति हिंदी भाषा को आसानी से बोल-समझ लेता है। यही इस भाषा की पहचान भी है कि इसे बोलने और समझने में किसी को कोई परेशानी नहीं होती।बदलते युग के साथ अंग्रेजी ने भारत की जमीं पर अपने पांव गड़ा लिए हैं। जिस वजह से आज हमारी राष्ट्रभाषा को हमें एक दिन के नाम से मनाना पड़ रहा है। पहले जहां स्कूलों में अंग्रेजी का माध्यम ज्यादा नहीं होता था, आज उनकी मांग बढ़ने के कारण देश के बड़े-बड़े स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे हिंदी में पिछड़ रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्हें ठीक से हिंदी लिखनी और बोलना भी नहीं आती है। भार‍त में रहकर हिंदी को महत्व न देना भी हमारी बहुत बड़ी भूल है। हिंदी जानने और बोलने वाले को बाजार में अनपढ़ या एक गंवार के रूप में या तुच्छ नजरिए से देखा जाता है, यह कतई सही नहीं है। हमें स्वतंत्रता तो मिल गई, लेकिन स्वभाषा नहीं मिल पाई, जिसके बिना स्वतंत्रता अभी भी अधूरी है। अत: देश के हर नागरिक की गरिमा बनी रहे, इसके लिए जरूरी है कि हर हिंदुस्तानी को अपनी भाषा का प्रयोग हर जगह, हर स्तर और हर समय करते रहना होगा। आज हर माता-पिता को चाहिए कि अपने बच्चों को विदेशी भाषा सिखाने पर जितना ज्यादा ध्यान दिया जाता है, उससे अधिक हिंदी की तरफ ध्यान देना होगा।

हिन्दी दिवस : कब, क्यों और कैसे मनाएं By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब हिंदी विश्व में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं में से एक है। विश्व की प्राचीन, समृद्ध और सरल भाषा होने के साथ-साथ हिंदी हमारी 'राष्ट्रभाषा' भी है। वह दुनिया भर में हमें सम्मान भी दिलाती है। हिंदी दिवस भारत में हर वर्ष '14 सितंबर' को मनाया जाता है।    भारत की स्वतंत्रता के बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एकमत से यह निर्णय लिया कि हिंदी की खड़ी बोली ही भारत की राजभाषा होगी। इसी महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिंदी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर सन् 1953 से संपूर्ण भारत में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को 'हिंदी दिवस' के रूप में मनाया जाने लगा।   हिंदी हिंदुस्तान की भाषा है। राष्ट्रभाषा किसी भी देश की पहचान और गौरव होती है। हिंदी हिंदुस्तान को बांधती है। इसके प्रति अपना प्रेम और सम्मान प्रकट करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है। इसी कर्तव्य हेतु हम 14 सितंबर के दिन को 'हिंदी दिवस' के रूप में मनाते हैं। कश्मीर से कन्...